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अपनी आज़ादी(त्याग-वीरों की याद)







अपनी








ज़ादी 
(सारे चित्र गूगल खोज से साभार संगृहीत)








मेरे भय्या बचा के रखना,

यह अपनी आज़ादी !

इसके लिये महापुरुषों ने,

अपनी जान लड़ा दी ||

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'राम कृष्ण' जब 'परमहंस' बन उठे, 'चेतना' जागी |

राजा राम मोहन ने जब,सारी खुशियाँ त्यागीं ||

उतरे भारत में ‘ईश्वर’,बन कर त्यागी, वैरागी ||

हो कर भावुक हुये एकजुट,भारत के अनुरागी ||

विद्दया-सागर-हृदय में लहरें उठीं बनीं अप्रमादी |

राष्ट्र-खेत में हुई अंकुरित, तब तो यह आज़ादी !!

मेरे भय्या बचा के रखना,यह अपनी आज़ादी !!१!!


  



जग कर ‘दया’,’विवेक’बन गये,धीर-वीर सेनानी |

भारतेन्दु,टैगोर जगे, जागे सब हिन्दुस्तानी ||

जागे ‘कर्म-वीर’ बन कर जब,कर्म-वित्त के दानी |

‘बडवानल’जल उठा ‘ज्वाल’बन,जब नयनों का पानी ||

तब घबराये , थर्राये, ’गोरे बन्दर’ अवसादी |

लगी उतरने जब कुबुद्धि पर चढ़ी हुई कुछ ‘बादी’ ||

मेरे भय्या बचा के रखना,यह अपनी आज़ादी !!२!!


   




मंगल पाण्डेय ने ‘जागो’ कह,’भारत धर्म’ बचाया |

लक्ष्मीबाई,नाना ने तब,रन का व्यूह रचाया ||

जागी ग़ालिब,जफ़र बदलने,युग की रोगी काया |

वीरों ने उठ उठ कर अपना,क्रान्ति-शंख बजाया ||

मिल कर सबने आशा की उज्जवल नव ज्योति जला दी |

या कि निराशा की मुरझाई बगया पुनः खिला दी ||

मेरे भय्या बचा के रखना,यह अपनी आज़ादी !!३!!



    


वीर गोखले,गान्धी,नेहरू,कमर कसे उठ धाये |

‘लाल’,’बाल’औ‘पाल’सदृश’युग पुरुष जगे उठ आये ||

वीर सुभाष फ़ौ ज एकत्रित करके जब जुट आये |

‘शेखर’,‘भगत सिंह, ‘बिस्मिल’,’अशफ़ाक’ने प्राण लुटाये ||

सबने अपने अपने जीवन की ‘मस्तियाँ’ लुटा दीं |

‘स्वतंत्रता’की बलि-वेदी पर,’सुख’की भेंट चढ़ा दी ||

मेरे भय्या बचा के रखना,यह अपनी आज़ादी !!४!!



  
  




लाल बहादुर,अब्दुल कलाम,औ ‘आज़ाद’ दीवाने |

शान्ति,क्रान्ति दोनों के जूझे ‘दीपक’ पर ‘परवाने’ ||

अंग्रेज़ों के पाप के ताने बाने चले मिटाने |

‘नर्क’ हुआ था भारत,इसको फिर से ‘स्वर्ग’बनाने ||

‘अंग्रेजो,भारत छोड़ो’की की पुरज़ोर मुनादी ||

‘स्वदेश’का बल, त्याग के निकला वैभव,सोना चाँदी ||

मेरे भय्या बचा के रखना,यह अपनी आज़ादी !!५!!



 










‘जालियाँ वाला बाग’रक्त से रँगा था रँगा ‘काकोरी‘|

मेरठ दिल्ली रँगे, रँग गया, देखो चौराचौरी ||

गली गली जग गयी‘प्रेरणा’ घर घर ,पौरी पौरी |

शिथिल पड़ चली इन यत्नों से,गोरों की बरज़ोरी ||

प्रणवीरों ने, रणवीरों ने रक्त की नदी बहा दी |

पुनः त्याग की परिपाटी थी,इस राष्ट्र में चला दी ||

मेरे भय्या बचा के रखना,यह अपनी आज़ादी !!६!!





 





जाग गया हर हृदय बन गया,स्वतंत्रता सेनानी |

‘लौह पुरुष’ बन ‘पटेल’ जागे, परम वीर लासानी ||

बच्चे बच्चे ने दिखलाई थी पुरजोर जवानी |

देख देख ‘जागरण’ मर गयी, अँग्रेज़ों की नानी ||

इस ‘जागरण-ज्योति’ ने काली पाप की धुन्ध हटा दी |

‘संगठना’ ने ‘भेद-भाव’ की हर दीवाए गिरा दी ||

मेरे भय्या बचा के रखना,यह अपनी आज़ादी !!७!!







खुदीराम,ऊधम सिंह जागे, मदन धींगरा जागे |

होड़ मच गयी, ‘त्याग यज्ञ’ में कौन बढ़ेगा आगे ||

फूँक फूँक बारूद, गोलियाँ औ हथगोले दागे |


फूँक फूँक बारूद, गोलियाँ औ हथगोले दागे |

सोच रहे अँगरेज़, बचाने ‘स्वत्व’ किधर को भागे ||

मर मिटने को परवाने थे, निकले पहने खादी |

विदेशियों की आन,मान की शान की चमक मिटा दी ||

मेरे भय्या बचा के रखना,यह अपनी आज़ादी !!८!!

  

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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (19 August 2012 at 06:17)  

ईद मुबारक !
आप सभी को भाईचारे के त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाएँ!
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इस मुबारक मौके पर आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (20-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Anonymous –   – (7 November 2012 at 00:48)  

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