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जून 2014 के बाद की गज़लें/गीत (4) काल-प्रणेता हमें चाहिये !

    (सरे चित्र 'गूगल-खोज' से साभार)
गांधी जी के लिए चित्र परिणाम

दूरदर्शिता जिसमें हो वह काल-प्रणेता हमें चाहिये !
जन-जन का अनुरागी हो जो ऐसा नेता हमें चाहिये !!
गाँव-गाँव में, नगर-नगर में घूमे, गिरता देश सँवारे !
पाखण्डों का खण्डन करके, इस समाज की दशा सुधारे !!
जो विवेक का दीप जलाकर, चमका हुआ उजाला कर दे-
समाज का उद्धारक बन कर,सब के आगे ज्ञान उचारे !!
केवल अपने हित से हट कर, परमार्थ की नीति निभाये-
सब के हित की बात करे जो, वह शुभचिंतक हमें चाहिये !
  जन-जन का अनुरागी हो जो ऐसा नेता हमें चाहिये !!1!!


भ्रष्टाचार मिटाये, फैले अनाचार के दानव मारे !
दुश्मन हो हर दरिन्दगी का, जिससे खुश हों मानव सारे !!
पुत्र मान कर प्यार करे जो प्रजा से, दम्भ से दूर रहे जो-
जो गिरतों को सदा उठाये, डूब रहे को सदा उबारे !!
जमाखोरियाँ जिसे न भायें, पेटूपन से दूर रहे जो-
जो लालच के जाल न उलझे, कोई मसीहा हमें चाहिये !
  जन-जन का अनुरागी हो जो, ऐसा नेता हमें चाहिये !!2!!


घूस-दलाली दूर करे जो, उत्पादन को खूब बढाये !
सुरसा जैसा मुहँ फैलाये बढ़ते-चढ़ते दाम घटाये !!
निर्धन केघर किये बसेरा, पसर रही महँगाई मारे !
रोज़गार जो बाँट सभी को, भूख-प्यास की पीर मिटाये !!
सेवा की साधना करे जो, ऐसा साधक हमें चाहिये !
जन-जन का अनुरागी हो जो, ऐसा नेता हमें चाहिये !!3!!

लाल बहादुर शास्त्री के लिए चित्र परिणाम

शान्त हो पर क्रान्ति-वीर हो, जो अच्छे परिवर्तन लाये !
और पुरानी हितकारी हर रीति-नीति को सदा निभाये !!
जन-साधारण जैसा रह कर, श्रम-जल से जो सींच-सींच कर-
अखिल देश की फुलवारी में, “प्रसून” महके हुये खिलाये !!
सतर्क हो जो, हर क्यारी का ध्यान रखे, हो समतावादी-
ऐसे सुन्दर गुण हों जिसमें, ऐसा माली हमें चाहिये !
जन-जन का अनुरागी हो जो, ऐसा नेता हमें चाहिये !!4!!


कविता रावत  – (12 September 2014 at 04:30)  


आज किसी को नेता कहना किसी बहुत बड़ी गाली से कम नहीं समझा जाता ..यह सब आज के स्वार्थी नेताओं की वजह से हुआ है ...आज सच्चे नेताओं की वास्तव में बड़ी दरकरार है
... बहुत बढ़िया प्रेरक प्रस्तुति

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक  – (12 September 2014 at 09:16)  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (13-09-2014) को "सपनों में जी कर क्या होगा " (चर्चा मंच 1735) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच के सभी पाठकों को
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Virendra Kumar Sharma  – (12 September 2014 at 21:08)  

अति-उत्कृष्ट रचना इतिहास के झरोखे से कलियुग में सतयुग तलाशती सी।

Vaanbhatt  – (12 September 2014 at 21:53)  

अति सुन्दर...

कालीपद "प्रसाद"  – (12 September 2014 at 23:11)  

अति उत्तम रचना ,कीचड़ में कमल खिलाने की चाह लिए रचना !
दिल की बातें !

Onkar  – (13 September 2014 at 21:16)  

सुंदर प्रस्तुति

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