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सब के चेहरे खिले हुये हों (दीपावली पर विशेष )

 (सरे चित्र 'गूगल-खोज' से साभार) 
सब के चेहरे खिले हुये ज्यों- फूल बाग की डाली के !
जगमग-जगमग करें रोशनी, दिल में दीप दिवाली के !!
एक जगह पर जमा सभी हों, सारे लोग नगरिया के !
बन जाएँ सब ताने-बाने, मिल कर प्रेम-चदरिया के !!
ग्रस्त अभावों से हों, उनकी भूख मिटायें सब मिल कर- 
हर प्यासे की प्यास  बुझायें, बन कर पानी दरिया के !!
सच्चा प्रेम जगे तो समझें, एक हक़ीकत यह ही है-
सारे जगत-निवासी होते, पेड़ एक ही माली के !
जगमग-जगमग करें रोशनी, दिल में दीप दिवाली के !!1!!
खाने को भर पेट नहीं हो, जिस ग़रीब के घर रोटी !
जिसका क़द छोटा लगता हो, जिसकी हो हस्ती छोटी !!
स्वार्थ-भावना छोड़ प्यार के भाव जगायें हम मन में-
छल-कपट त्याग दें जिससे, सुधर सके नीयत खोटी !!
हर निर्धन के घर ले जायें, एक दीप हम निज घर से !
एक साथ सब मिल क्र गायें, गीत सभी खुशहाली के !
जगमग-जगमग करें रोशनी, दिल में दीप दिवाली के !!2!!
रंग अलग है, गन्ध अलग है, एक बाग के “प्रसून” सब |
 सब को जीवन देने वाला, सब का मालिक एक है रब ||
पैदा सब को किया उसी ने, पिता है सब का एक वही-
हमें बताओ कोइ बन्दा अलग किसी से कैसे तब ??
सब लालों में रचे-बसे हैं रंग उसी की लाली के !

जगमग-जगमग करें रोशनी, दिल में दीप दिवाली के !!3!!

vibha rani Shrivastava  – (23 October 2014 at 21:57)  

उम्दा अभिव्यक्ति। ....

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