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गज़ल-कुञ्ज (क्रमश:)-(अ) प्रणाम - (१)प्रियतम प्रणाम (ग़) (तुम जाने पहंचाने प्रियतम)

  
तुम जाने पहंचानेप्रियतम !
पर लगते अनजाने प्रियतम !!

यह सारा जग भटक रहा है -
प्यार तुम्हारा पाने प्रियतम ||
    
    
कोकिल भ्रमरों ने पाये मृदु -
स्वर हैं तुम्हें रिझाने प्रियतम || 
 
सह ली विरह -वेदना,फिर भी -
गाये मधुर तराने प्रियतम ||
    
     
तुम्हें याद कर बिता दिए हैं -
कुछ पल आने जाने प्रियतम ||
  
जग के सारे रिश्ते नाते -
पड़ते हमें निभाने प्रियतम ||


तुम्हें लुभाते प्यार लुटा कर -
"प्रसून"हँसे सुहाने प्रियतम ||

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गज़ल-कुञ्ज (गज़ल-संग्रह) (अ)प्रियतम प्रणाम(आराधना गज़ल) (१) प्रियतम प्रणाम -(ख) प्रियतम तुमको मेरा प्रणाम

 
 (१)प्रियतम प्रणाम (क्रमश:)--

(ख)प्रियतम तुमको मेरा प्रणाम !
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
तुम अनाम फिर भी कोटिनाम |
प्रियतम तुमको मेरा प्रणाम !!

निर्बाध 'काल'की गति मन्थर-
रोकते उसे भी दे विराम ||
 
कण कण में तुम रमते हो यों-
कहते तुमको लोग राम ||

कामना-हीन निष्काम हो तुम !
पर तुम हो अनन्त सत्य काम || 
 
अनिकेत,किन्तु सर्वत्र व्याप्त |
जड़- चेतन सबके परम धाम || 

जो मिले, तुम्हारी कृपा -गन्ध-
हो जाये 'प्रसून' धन्य नाम ||


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