Powered by Blogger.

Followers

Showing posts with label गजल(ब्याजोक्ति). Show all posts
Showing posts with label गजल(ब्याजोक्ति). Show all posts

मौसमके उपहार

प्रीति -डोर में हमें बाँधने को आया मौसम |
बिखरे रिश्ते, इन्हें साधने को आया मौसम||

वन में नाचे मोर , बादलोँ को जब देखा है-
बात नहीं यह सत्य,नाचने को आया मौसम||

खट्टे-मीठे फल गदराये , पके रसीले हैं-
लगता है उपहार बाँटने को आया मौसम||

बन्ध तनावों के ये सुंदर कस कर जकड़े हैं-
मानो सारे बन्ध काटने को आया है मौसम||

एक शैड में बैठे हैं वारिश से बचने को-
नफ़रत की खाइयाँ बाँटने को आया मौसम||
खिले "प्रसून" सभी डालों पर ,किलकारी भर के-
सुस्ती वाला जाल काटने को आया मौसम||

Read more...

About This Blog

  © Blogger template Shush by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP