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ऐसी ईद मनाना तुम ! (एक ब्याजोक्ति)


 

ऐसी ईद 




मनाना तुम !


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मन में भी मिठास भर देना,ऐसी ईद मनाना तुम !

मिल-जुल करके साथ सिवैयाँ,और मिठाई खाना तुम !!


कोंई तुमसे रूठ गया हो, ले कर कुछ ‘खटास’ दिल में –

भूल के शिकबे, गिले, पास में जा कर उसे मनाना तुम ||




दुश्मन भी गर दरवाज़े पर, आ जाए मिलने तुमसे -

भूल दुश्मनी,आगे बढ़ कर,उसको गले लगाना तुम !!


नीयत की दौलत सँभाल कर के,बड़ी हिफ़ाजत से रखना-

‘लालच’के हर जाल से बचना, औ ईमान बचाना तुम !!


मजहब की दीवार तोड़ कर,दिल को बहुत बड़ा करना-

जिसके पास हो प्यार का हीरा,अपना उसे बनाना तुम!!
  



किसी धर्म का,किसी जाति का,अमीर हो या मुफलिस हो –


वतन परस्ती जिसमें भी हो,उस पर प्यार लुटाना तुम!!

 


नकली खुशबू “प्रसून”में हो,दूर सदा उस से रहना-

‘गुलशन’के असली फूलों से रिश्ते सदा निभाना तुम !!

 



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ईद में मेरे बिरादर तुम ! (प्यार का एक सन्देश)


    


ईद में मेरे बिरादर तुम !


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गले मिलो तो दिल भी मिलना,ईद में मेरे बिरादर तुम !


सीने में बन ‘प्यार’ मचलना, ईद में  मेरे बिरादर तुम !!





मन में नफ़रत और दिखावा, नकली प्यार का नाटक कर-


किसी बशर को तुम मत छलना,ईद में मेरे बिरादर तुम !!




कहो सभी से,”चलो नमाज़ को,मिलजुल कर के सब यारो”-


ईदगाह में साथ ही चलना , ईद में मेरे बिरादर तुम !!



 ‘राजनीति’,’छल’,’कपट’ भूल कर,याद इलाही को करना-


नीयत बाँध, नमाज़ को पढना,ईद में मेरे बिरादर तुम !!




‘नफ्स’ की मैल न चढने देना,अपने दिल की पर्तों में


हो कर सफ़ा दुआयें करना,ईद में मेरे बिरादर तुम !!



 


अखलाकों में चुभते काँटे, मत रखना, जो दिल में चुभें-


“प्रसून”बन कर‘चमन’में खिलना,ईद में मेरे बिरादर तुम ||


  

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कन्हैया जन्म लेंगे कल यहाँ (एक गम्भीर,मीठा,व्यंग्य-प्रहार}

         

        लोग कहते हैं कन्हैया जन्म लेंगे कल यहाँ |
            
 व्रती, खा कर माल, दिन भर व्रत रखेंगे कल
यहाँ ||

              

           भार धरती के उठैया, सब के दाता अन्न के -

            एक खीरे से निकल कर, कुछ चखेंगे कल यहाँ ||



         
           'रमापति 'स्वामी हैं जग की 'लक्ष्मी 'के, देखिये !
            कलेण्डर में छपे,कौड़ी में बिकेंगे , कल यहाँ ||
 
               जिनके दिल में रंच श्रद्धा ,आस्था, निष्ठा नहीं -
           उनके घर जन्माष्टमी -मेले लगेंगे कल यहाँ ||

                
            नकली मावे, नकली घी के बने जो पकवान हों-
             
वे प्रसादों की तरह जम कर बंटेंगे कल यहाँ   
 
          
     
          चुराकर बागों से तोड़े गये होंगे जो "प्रसून"-
               शान से भगवान के चरणों चढेंगे कल यहाँ ||



    

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