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जून 2014 के बाद की गज़लें/गीत(20) अच्छे काम अकेला कर ! (‘शंख-नाद’ से)

                                        (सारे चित्र' 'गूगल-खोज' से साभार)
                                 
इस दुनिया में माना थोड़ा, सच का बहुमत कठिन बहुत |
बढ़ा आत्मबल और भरोसा, अच्छे काम अकेला कर !!
सभी गुरुजनों से तूने यह जीवन जीना सीखा है |
उनकी कृपा से जिन्दा रहने, का आ गया सलीका है !!
तुम पर जो उपकार किये हैं, उनको मत अनदेखा कर !
बढ़ा आत्मबल और भरोसा, अच्छे काम अकेला कर !!1!!
जन्म दिया है तुझे जिन्होंने, जिनकी गोद में खेला है |
तेरे ख़ातिर कई तरह का, दर्द जिन्होंने झेला है ||
अपने माता और पिटा की, तन-मन-धन से सेवा कर !
 बढ़ा आत्मबल और भरोसा, अच्छे काम अकेला कर !!2!!
चला भलाई की राहों पर, कोई साथ न आया है |
माना, तूने दुःख झेले हैं, अपना धर्म निभाया है || 
चिन्ता मत कर, नेक काम तू, रह नकार के अलबेला कर !
बढ़ा आत्मबल और भरोसा, अच्छे काम अकेला कर !!3!!
चल तो पड़ अपनी मंज़िल पर, लोग साथ जुड़ जायेंगे !
निराश मत हो, लोग हज़ारों, तेरे पीछे आयेंगे ||
मार्ग में चट्टानें आयें, रोके तेरे क़दमों को-
हाथों में हिम्मत बटोर कर, पथ से उन्हें ढकेला कर !
बढ़ा आत्मबल और भरोसा, अच्छे काम अकेला कर !!4!!



Kailash Sharma  – (8 November 2014 at 05:49)  

बहुत सारगर्भित प्रस्तुति...

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