जून 2014 के बाद की गज़लें/गीत(20) अच्छे काम अकेला कर ! (‘शंख-नाद’ से)
>> Saturday, 8 November 2014 –
गीत
(सारे चित्र' 'गूगल-खोज' से साभार)
इस दुनिया में माना थोड़ा,
सच का बहुमत कठिन बहुत |
बढ़ा आत्मबल और भरोसा,
अच्छे काम अकेला कर !!
सभी गुरुजनों से तूने यह
जीवन जीना सीखा है |
उनकी कृपा से जिन्दा
रहने, का आ गया सलीका है !!
तुम पर जो उपकार किये
हैं, उनको मत अनदेखा कर !
बढ़ा आत्मबल और भरोसा,
अच्छे काम अकेला कर !!1!!
जन्म दिया है तुझे
जिन्होंने, जिनकी गोद में खेला है |
तेरे ख़ातिर कई तरह का,
दर्द जिन्होंने झेला है ||
अपने माता और पिटा की,
तन-मन-धन से सेवा कर !
बढ़ा आत्मबल और भरोसा, अच्छे काम अकेला कर !!2!!
चला भलाई की राहों पर,
कोई साथ न आया है |
माना, तूने दुःख झेले
हैं, अपना धर्म निभाया है ||
चिन्ता मत कर, नेक काम तू,
रह नकार के अलबेला कर !
बढ़ा आत्मबल और भरोसा,
अच्छे काम अकेला कर !!3!!
चल तो पड़ अपनी मंज़िल पर,
लोग साथ जुड़ जायेंगे !
निराश मत हो, लोग हज़ारों,
तेरे पीछे आयेंगे ||
मार्ग में चट्टानें आयें,
रोके तेरे क़दमों को-
हाथों में हिम्मत बटोर
कर, पथ से उन्हें ढकेला कर !
बढ़ा आत्मबल और भरोसा,
अच्छे काम अकेला कर !!4!!
गजब
बहुत सारगर्भित प्रस्तुति...