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सामयिकी --मातृ-दिवस |


    कल  नेटवर्क की समस्या  हल न्होंने के कारण आज 'मातृ दिवस'  हेतु प्रस्तुत हूँ !
(सारे चित्र 'गूगल-खोज' से साभार) 

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नारी के  मन  से  हट जाये, यदि ‘तनाव का भार |

‘मातृ-दिवस’  का  पर्व  मनाये,  तब  सारा संसार ||

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रोकें  अपहरणों को,  रोकें  ‘लाज  की होती  लूट’ |

‘दरिन्दगी’ को दें मत, अब हम और तनिक भी छूट ||



‘बलात्कारी पशुओं’  को  हम  दें  मिल  कर के मार |

‘मातृ-दिवस’  का  पर्व  मनाये,  तब  सारा संसार ||१||


भोली   कन्यायें   हैं  ‘जगदम्बा’  का  सचमुच   रूप |

इन  में  ‘वत्सलता-ममता’  होंती   है   परम  अनूप  ||

कन्याओं पर  पड़े कहीं  मत, ‘घृणित  मौत  की मार ‘ |

‘मातृ-दिवस’  का  पर्व  मनाये,  तब  सारा संसार ||२||


नारी   में   है  सरस्वती – लक्ष्मी - दुर्गा  का   ‘अंश’ |

तथा  उदर   में   यही  पालती   और  पोषती  ‘वंश’ ||


हम   समझें   कि  यही  ढालती,  ‘मानवता - आकार’ |

‘मातृ-दिवस’  का  पर्व  मनाये,  तब  सारा संसार ||३||







शालिनी कौशिक  – (12 May 2013 at 21:30)  

बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति बधाई

Rajesh Kumari  – (13 May 2013 at 04:59)  

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल १४ /५/१३ मंगलवारीय चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां स्वागत है ।

Ashok Khachar  – (13 May 2013 at 05:53)  

bhot sundar waaaaaaaaaaah
duniya ki sari ma ao ko mera nman

कालीपद प्रसाद  – (13 May 2013 at 21:26)  

बहुत अच्छी प्रस्तुति!

अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (14 May 2013 at 02:29)  

बहुत सुन्दर चित्रमयी प्रस्तुति!
माँ को नमन!

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